खामोशी तुम समझोगी नहीं

न मिले किसी का साथ तो हमें याद करना,
तन्हाई महसूस हो तो हमें याद करना।
खुशियाँ बाँटने के लिए दोस्त हजारों रखना,
जब ग़म बाँटना हो तो हमें याद करना।

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चलो अब जाने भी दो,

क्या करोगे दास्तां सुनकर…

खामोशी तुम समझोगी नहीं,

और बयां हमसे होगी नहीं…!

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