तुम पे मरते मरते

हमारी मौत भी क्या मौत होगी..!

यूँ ही मर जाऊँगा तुम पे मरते-मरते ..!

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भीड़ की आदत नहीं मुझे,

थोड़े में जीना सीख लिया है मैंने,,,,,
चन्द दोस्त हैं, चन्द दुआएं हैं,

बस इन खुशियों को गले लगा लिया मैंने ।

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