तेरे ही बन्दे तेरी मस्जिद में

ए खुदा मोहूबत भी तूने अजीब चीज बनाए है,

तेरे ही बन्दे तेरी मस्जिद में तेरे ही सामने रोते है,

लेकिन तुजे नहीं किसी और को पानेके लिये…

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कुछ रश्क दिल में ही छुपा लुंगी,

दर्द का पैमाना ये बस छलकता रहे
कुछ अश्क समन्दर में बहा दुंगी ।

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